उत्तर प्रदेशगोंडा

नगर पंचायत बभनान: 5 साल की वारंटी वाली लाइटें 2 साल में ही गायब, मरम्मत के नाम पर भी घोटालों का आरोप

चेयरमैन-ईओ की जुगलबंदी और ठेकेदारों की 'चांदी': बभनान के विकास कार्यों पर उठे गंभीर सवाल क्या बभनान में अब भी जारी रहेगी 'लूट'? जनता पूछ रही है—आखिर कब तक चलता रहेगा भ्रष्टाचार का यह खेल?

अजीत मिश्रा (खोजी)

नगर पंचायत बभनान में ‘लाइट’ के नाम पर बड़ा खेल: करोड़ों के घोटाले का आरोप

  • नगर पंचायत बभनान में ‘रोशनी’ के नाम पर ‘अंधेरगर्दी’: दो साल में ही फुस्स हो गईं लाखों की रोड लाइटें!
  • बभनान में भ्रष्टाचार का खुला खेल: आरटीआई से सूचना छिपाने के लिए ईओ भरने को तैयार 25 हजार का जुर्माना

बस्ती। नगर पंचायत बभनान में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जहां मुख्य रूप से ‘रोड लाइट’ के नाम पर बड़ा घोटाला किए जाने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इसे भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा बताया जा रहा है।नगर पंचायत बभनान में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ जनता को ‘रोशनी’ देने के नाम पर सरकारी खजाने का बंदरबांट किया जा रहा है। सड़कों पर लगी लाइटें महज दो साल में ही दम तोड़ रही हैं, जबकि दावा पांच साल तक जलने का किया जाता है।

सवालों के घेरे में ‘चेयरमैन’ और ‘ईओ’ की जुगलबंदी

​नगर पंचायत में चल रहे इस ‘लाइट घोटाले’ को लेकर तीखे सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि नगर पंचायत आरटीआई (RTI) के तहत जानकारी देने से कतराती है, तो इसका सीधा मतलब है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।

  • जिम्मेदारी से भागते अधिकारी: ईओ (EO) पर अब तक 25 हजार रुपये का जुर्माना लग चुका है, लेकिन वे सूचना देने के बजाय जुर्माना भरना बेहतर समझते हैं, ताकि भ्रष्टाचार की परतें न खुल सकें।
  • मिलीभगत का आरोप: शिकायतकर्ताओं का कहना है कि चेयरमैन और ईओ की मिलीभगत के बिना यह ‘लूट’ संभव नहीं है। चेयरमैन का पहला ध्यान अपने हित पर होता है और ईओ वही करते हैं जो चेयरमैन चाहते हैं।
  • ठेकेदारों की चांदी: चर्चा है कि विकास कार्यों के नाम पर गनेशपुर के ठेकेदार आशुतोष श्रीवास्तव को 150 प्रतिशत से अधिक ठेका पट्टा दिया जाता है, जो खुद में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

​आरटीआई (RTI) से सूचना छिपाने का खेल

​इस पूरे मामले में नगर पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है:

  • ​नगर पंचायत द्वारा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी को नहीं दिया जाना, भ्रष्टाचार को छिपाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
  • ​ईओ (EO) पर अब तक 25 हजार रुपये का जुर्माना लग चुका है, जिसे वे अपने वेतन से भरने को तैयार हैं, लेकिन जानकारी देने से बच रहे हैं। जानकारों का मानना है कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि जानकारी देने पर उन पर हमले शुरू हो जाएंगे।

​चेयरमैन और ईओ पर मिलीभगत के गंभीर आरोप

​स्थानीय शिकायतकर्ता विवेक तिवारी और अन्य लोगों ने चेयरमैन और ईओ पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगाए हैं:

  • ​आरोप है कि चेयरमैन और ईओ की मिलीभगत के बिना यह ‘लूट’ संभव नहीं है, क्योंकि भुगतान पर दोनों के हस्ताक्षर होते हैं।
  • ​चेयरमैन पर आरोप है कि वे अपने हितों को प्राथमिकता देते हैं और ईओ केवल वही कार्य करते हैं जो चेयरमैन चाहते हैं।
  • ​वार्ड तीन पटेल नगर में लगाए गए रोड लाइट दो साल भी नहीं चल पाए, जबकि नियमतः इन्हें पांच साल तक चलना चाहिए था।

​ठेकेदारों को अनुचित लाभ का दावा

​मामले में ठेकेदारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं:

  • ​यह आरोप लगाया जा रहा है कि गनेशपुर के ठेकेदार आशुतोष श्रीवास्तव को 150 प्रतिशत से अधिक का ठेका पट्टा दिया जाता है।
  • ​सर्वाधिक सवाल ठेकेदार द्वारा किए गए कार्यों की गुणवत्ता और उन पर उठाए गए खर्चों को लेकर पूछे जा रहे हैं।
  • ​क्षेत्र के लोगों का कहना है कि रोड लाइट की मरम्मत के नाम पर भी बड़ा घोटाला किया जा रहा है।

​प्रशासनिक निष्क्रियता और जनता का आक्रोश

​स्थानीय नगर निकाय में प्रभार मिलने के बाद से लोगों को उम्मीद थी कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, लेकिन परिणाम विपरीत रहे हैं।

  • ​नगर पंचायत के एक जिम्मेदार व्यक्ति का कहना है कि अधिकारी बदलने से कोई सुधार नहीं हुआ है, क्योंकि व्यवस्था वैसी ही चल रही है।
  • ​स्थानीय लोगों का सुझाव है कि अगर डीएम मैडम को सच देखना है, तो उन्हें स्वयं बभनान आकर विकास कार्यों की स्थिति का जायजा लेना चाहिए।
  • ​आरोप है कि शिकायत करने वालों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और नगर पंचायत के कर्मचारियों द्वारा कोई कार्रवाई न करना इस भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है।

क्या मैडम डीएम की नींद खुलेगी?

​स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले से व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया है। जब तक चेयरमैन की कार्यप्रणाली पर लगाम नहीं लगेगी, तब तक बभनान का विकास एक सपना ही रहेगा।

​स्थानीय निवासी और शिकायतकर्ता विवेक तिवारी का स्पष्ट कहना है कि बभनान में केवल लाइट ही नहीं, बल्कि उसकी मरम्मत के नाम पर भी बड़ा घोटाला किया जा रहा है। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इस ‘अंधेरगर्दी’ पर कोई ठोस कार्रवाई करेगा या फिर बभनान की जनता इसी तरह भ्रष्टाचार के अंधेरे में पिसती रहेगी!

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